Wednesday, February 13, 2008
बहुत याद आया
आज रूठा हुआ एक दोस्त बहुत याद आया
वो गुज़रा हुआ ज़माना आज बहुत याद आया
सीने में जिसके छिपा था मेरा हर एक राज
वो मेरे दिल का हमदर्द आज बहुत याद आया
अपनों ने तो सरे-बाज़ार नीलाम करदी शख्सियत
बेगानी महफ़िल में कोई पराया बहुत याद आया
तमाम दुनिया से लड़ने को मजबूर करता था कभी
कच्चे धागों का वो बन्धन आज बहुत याद आया
दुश्मनों से गले मिलने वालों के हम ही मददगार थे
'विजय' को दोस्ती का वो ज़माना बहुत याद आया
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