Friday, April 04, 2008
एक बार पुकारा होता
अगर इंसान समझ जाए इस जमाने की नीयत
तो हर जर्रा आज आसमान का सितारा होता
ये हमारी ज़िंदगी वीरान भी है और खूबसूरत भी
अगर हमने कभी कायदे से इसको गुजारा होता
कागज़ की इन बेजान तस्वीरों में क्या रखा है
आईने में ख़ुद को देखते तो चेहरा हमारा होता
आंखों में इंतज़ार होता अगर किसी के आने का
हर एक आहट पर धड़कता दिल तुम्हारा होता
हाथों में लिखी लकीरे भी बदल जाया करती है
सच्चे दिल से अगर कभी एक बार पुकारा होता
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