Monday, July 31, 2006

सावन


सावन के महीने में मेरी याद ने
कभी तुम्हारा मन तरसाया होगा

तड़पती यादों के प्यासे रेगिस्तान पर
मेरी चाहत का पानी बरसाया होगा

तन्हा रातों के सूनेपन से घबराकर
कभी मुझे सपनों में बुलाया होगा

अपने सपनों की जवान महफिल को
तुमने मेरी ही याद से सजाया होगा

अपने ख्यालों में कभी तुमने मुझे
दिल की धडकनों में बसाया होगा

तुमने अपने आप को अकेला पाकर
मेरी याद के साथ वक्त बिताया होगा

अकेलेपन की साथी मेरी उस याद से
तुमने अपना प्यार तो जताया होगा

कभी उदासी के पलों में मेरी याद ने
तुम्हारी प्यारी आंखों को रुलाया होगा

कभी किसी पल मुझे अपना मानकर
तुमने कोई सुंदर सपना सजाया होगा

जोड़कर अपना नाम 'विजय' के साथ
ना जाने कितनों का दिल जलाया होगा

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